नार्को टेस्ट से पहले उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी क्यों? अंकिता केस में VIP एंगल पर कांग्रेस ने उठाए सवाल  

 
नार्को टेस्ट से पहले उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी क्यों? अंकिता केस में VIP एंगल पर कांग्रेस ने उठाए सवाल

श्रमिक मंत्र,देहरादून। उत्तराखंड कांग्रेस ने आज प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अंकिता भंडारी हत्याकांड में उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी की टाइमिंग और कथित वीआईपी की जांच पर गंभीर सवाल उठाए। प्रेस वार्ता को प्रदेश कांग्रेस कमेटी की उपाध्यक्ष सुजाता पॉल और महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने संबोधित किया।

सीबीआई जांच शुरू होने के बाद उर्मिला सनावर से पूछताछ हुई और सीबीआई की टीम उनके सहारनपुर स्थित आवास पर पहुँची। 23 अक्टूबर को उर्मिला सनावर और पूर्व भाजपा विधायक सुरेश राठौर ने नार्को और पॉलीग्राफ टेस्ट के लिए देहरादून कोर्ट में सहमति दी थी। अगली कानूनी प्रक्रिया 26 अक्टूबर को आगे बढ़नी थी, लेकिन 24 अक्टूबर की रात एक अलग शिकायत पर मुकदमा दर्ज हुआ और 25 अक्टूबर को उर्मिला को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया।

सुजाता पॉल ने सवाल उठाया कि जब उर्मिला नार्को टेस्ट के लिए सहमति दे चुकी थीं और कथित VIP से जुड़े गंभीर आरोपों में बड़े नामों का उल्लेख कर रही थी, तो ठीक अगली पेशी से पहले उनकी गिरफ्तारी क्यों हुई? क्या इस कार्रवाई से नार्को टेस्ट की प्रक्रिया प्रभावित या विलंबित होगी? पहले भी इसी विवाद से जुड़ी शिकायत और गैर-जमानती वारंट की बात सामने आई थी। ऐसे में पुरानी और नई कार्रवाई के बीच अंतर तथा गिरफ्तारी के समय को लेकर पुलिस को स्पष्ट जवाब देना चाहिए।

सुजाता पॉल ने कहा कि उर्मिला ने अपने बयानों में कथित वीआईपी दुष्यंत कुमार गौतम और उनके वरिष्ठ नेताओं से जुड़े गंभीर आरोप लगाए हैं। इन आरोपों की सत्यता जांच का विषय है। सीबीआई को स्पष्ट करना चाहिए कि इन बयानों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जाँच कहाँ तक पहुँची है। क्या कथित वीआईपी को लेकर किसी तरह के दबाव या मामले में समझौता करने की कोशिश हुई? यदि ऐसा कोई आरोप या साक्ष्य सामने आया है, तो उसकी स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। किसी भी व्यक्ति को दोषी मानने से पहले तथ्य सामने आना जरूरी है, लेकिन गंभीर सवालों को अनुत्तरित भी नहीं छोड़ा जा सकता।

महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष ज्योति रौतेला ने कहा कि अंकिता भंडारी के माता-पिता अपनी बेटी को न्याय दिलाने के लिए लगातार दर-दर भटक रहे हैं। परिवार की पीड़ा और उत्तराखंड की जनता में इस मामले को लेकर व्याप्त आक्रोश का सम्मान करते हुए सरकार और जांच एजेंसियों को पारदर्शी जवाब देना चाहिए। जब परिवार लंबे समय से कथित वीआईपी का नाम लेकर निष्पक्ष जांच की मांग कर रहा है, तो अब तक इस पहलू पर क्या प्रगति हुई है, यह सार्वजनिक रूप से स्पष्ट किया जाना चाहिए। दुष्यंत कुमार गौतम की नियुक्ति और इस प्रकरण से जुड़े सवालों के बीच क्या किसी तरह का दबाव या समझौता कराने का प्रयास हुआ, इस बारे में भी उपलब्ध तथ्यों के आधार पर जांच होनी चाहिए।

कांग्रेस ने माँग की कि उर्मिला सनावर के खिलाफ दर्ज अलग मुकदमे की जांच कानून के अनुसार चले, लेकिन इससे अंकिता भंडारी हत्याकांड के कथित वीआईपी एंगल की जांच प्रभावित नहीं होनी चाहिए। नार्को टेस्ट की प्रक्रिया अब किस तरह आगे बढ़ेगी, संबंधित एजेंसियां इसकी स्थिति स्पष्ट करें। अंकिता के माता-पिता को न्याय के लिए और इंतजार न करना पड़े तथा मामले के हर महत्वपूर्ण पहलू की निष्पक्ष जांच हो।

उत्तराखंड कांग्रेस ने कुछ प्रमुख मांगें भी रखीं:

1. नार्को टेस्ट की प्रक्रिया: उर्मिला सनावर की गिरफ्तारी के बाद नार्को टेस्ट की कानूनी प्रक्रिया किस स्थिति में है, सीबीआई और संबंधित अदालत इसकी स्थिति स्पष्ट करें तथा कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए।

1. कथित वीआईपी एंगल की निष्पक्ष जांच: उर्मिला द्वारा लिए गए नामों, उनके बयानों, ऑडियो रिकॉर्डिंग और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच हो और जांच की प्रगति पर स्पष्ट जानकारी दी जाए।

2. गिरफ्तारी की टाइमिंग पर जवाब: नार्को टेस्ट के लिए सहमति और अगली पेशी से ठीक पहले हुई गिरफ्तारी के समय तथा परिस्थितियों पर उत्तराखंड पुलिस स्पष्टीकरण दे।

3. दबाव या समझौते की कोशिश की जाँच: यदि कथित वीआईपी एंगल की जाँच को प्रभावित करने की कोशिश होती दिखाई दे रही है और सीबीआई इसमें वास्तविक स्थिति को भी जांच में शामिल करे।

4. सोशल मीडिया से उर्मिला सनावर के दिए गए बयान हटाने के प्रयास: सोशल मीडिया पोस्ट हटवाने या किसी तरह का दबाव बनाने के प्रयास की भी स्वतंत्र जांच सीबीआई के द्वारा की जाए।

5. पुराने और नए मुकदमों की स्थिति स्पष्ट हो: पहले दर्ज शिकायत, गैर-जमानती वारंट और वर्तमान मुकदमे में हुई कार्रवाई का कानूनी आधार स्पष्ट किया जाए।

6. अंकिता के माता-पिता को न्याय मिले: परिवार की माँगों पर गंभीरता से कार्रवाई हो और उन्हें जांच की प्रगति से अवगत कराया जाए।

7. उत्तराखंड कांग्रेस की मांग है कि अंकिता भंडारी हत्याकांड के हर पहलू की निष्पक्ष जांच हो, किसी भी दबाव की गुंजाइश न रहे और परिवार को न्याय दिलाने में और देरी न हो।