

मंत्री जोशी ने कहा कि आयुर्वेद भारत की प्राचीन एवं वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है, जो प्राकृतिक और पारंपरिक तरीकों से स्वस्थ एवं संतुलित जीवन को बढ़ावा देती है। आयुर्वेद न केवल रोग प्रबंधन में सहायक है, बल्कि मानसिक स्वास्थ्य, तनाव प्रबंधन, तंदुरुस्ती और समग्र कल्याण के लिए भी अत्यंत उपयोगी है। उन्होंने फाइटोकेमिस्ट्री पर प्रकाश डालते हुए कहा कि यह विज्ञान की वह शाखा है, जो पौधों में पाए जाने वाले रासायनिक यौगिकों की संरचना, गुण और उपयोग का अध्ययन करती है। फाइटोकेमेस्ट्री के माध्यम से औषधि विकास, पोषण एवं स्वास्थ्य, कृषि, पौध संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में शोध कार्य किए जा रहे हैं।
कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि उत्तराखंड में आयुर्वेद की संभावनाएं अत्यंत व्यापक हैं। यहां की समृद्ध वनस्पति और जैव विविधता नई औषधियों की खोज के लिए अपार अवसर प्रदान करती है। उन्होंने स्थानीय समुदायों में पीढ़ियों से चले आ रहे पारंपरिक आयुर्वेदिक ज्ञान के संरक्षण पर बल दिया। मंत्री जोशी ने कहा कि राज्य सरकार आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को जन-जन तक पहुंचाने के लिए निरंतर कार्य कर रही है, ताकि नागरिकों को सुरक्षित और प्राकृतिक चिकित्सा विकल्प उपलब्ध हो सकें। उन्होंने कहा कि आयुर्वेद और फाइटोकेमेस्ट्री के विकास से रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे, पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी।

उन्होंने एरोमा एवं एरोमेटिक मेडिसिन के क्षेत्र में भी कार्य करने की आवश्यकता पर जोर देते हुए बताया कि कृषि, उद्यान और सुगंध पौध केंद्र इस दिशा में सक्रिय रूप से कार्य कर रहे हैं। इस दौरान कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी ने सभी को नव वर्ष की अग्रिम बधाई एवं शुभकामनाएं भी दीं।
इस अवसर पर चेयरमैन एस फारुख, डॉ.आईपी सक्सेना, डॉ. दुर्गेश पंत, वी.के. तिवारी सहित कई लोग उपस्थित रहे।
