
श्रमिक मंत्र देहरादून। प्रदेश के कृषि एवं कृषक कल्याण मंत्री गणेश जोशी ने आज नई दिल्ली स्थित पूसा में केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्री भारत सरकार शिवराज सिंह चौहान की अध्यक्षता में आयोजित भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) सोसाइटी की 97 वीं वार्षिक आम बैठक में प्रतिभाग किया।
बैठक में देश के विभिन्न राज्यों के कृषि मंत्री, कृषि वैज्ञानिक एवं विभागीय अधिकारी उपस्थित रहे। इस दौरान कृषि क्षेत्र के विकास, किसानों के हितों से जुड़े विषयों तथा कृषि अनुसंधान एवं नवाचार को बढ़ावा देने सहित विभिन्न महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। कृषि मंत्री गणेश जोशी ने वार्षिक आम बैठक में कहा कि पर्वतीय कृषि वर्षा आधारित होने के साथ छोटी एवं विखंडित जोतों, कम उत्पादकता और वन्यजीवों से फसल क्षति जैसी समस्याओं से प्रभावित है, जिसके कारण परती भूमि और पलायन बढ़ रहा है। इसलिए पर्वतीय कृषि में फोकस अधिक उत्पादन से अधिक आय प्रति परिवार की ओर होना चाहिए।
कृषि मंत्री गणेश जोशी ने केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह करते हुए कहा कि आईसीएआर के माध्यम से उत्तराखंड के विभिन्न कृषि जलवायु क्षेत्रों के लिए आर्थिक रूप से लाभकारी फसल पद्धतियों पर विशेष प्रोजेक्ट शुरू करने के सुझाव दिए। इसके तहत कृषि, उद्यान, फलदार वृक्ष और पशुपालन को शामिल करते हुए ऐसे विविधीकृत एवं सतत मॉडल विकसित किए जाएं, जो छोटी जोतों पर किसानों को वर्षभर आय और रोजगार दें तथा युवाओं को कृषि क्षेत्र में रोजगार के अवसरों से जोड़ें।

कृषि मंत्री गणेश जोशी ने जलवायु परिवर्तन के बढ़ते प्रभावों को देखते हुए विवेकानंद कृषि अनुसंधान संस्थान, अल्मोड़ा और गोविंद बल्लभ पंत कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, पंतनगर के माध्यम से जलवायु अनुकूल एवं टिकाऊ कृषि पद्धतियों पर नया प्रोजेक्ट शुरू करने का भी
केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान से आग्रह किया। उन्होंने कहा कि अनुसंधान के परिणामों के आधार पर किसानों को जलवायु अनुकूल खेती के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा, जिससे किसानों की आय एवं रोजगार बढ़ाने के साथ पर्वतीय क्षेत्रों से पलायन रोकने में मदद मिलेगी।कृषि मंत्री गणेश जोशी ने कहा कि कृषि अनुसंधान और वैज्ञानिक तकनीकों का लाभ किसानों तक पहुंचाना समय की आवश्यकता है। उन्होंने कहा कि उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्थानीय जलवायु एवं भौगोलिक परिस्थितियों के अनुरूप कृषि और बागवानी को बढ़ावा देने के लिए अनुसंधान संस्थानों का सहयोग महत्वपूर्ण है।
