उत्तराखंड की विकास यात्रा में सहयोग दें उद्योग समूह – मुख्यमंत्री
‘उत्तराखंड सीएसआर डायलॉग’ कार्यक्रम में उद्योग जगत के प्रतिनिधियों के साथ किया संवाद


उन्होंने कहा कि देवभूमि में जन्म लेना का अवसर तो ईश्वर देता है, लेकिन हर कोई देवभूमि में कर्म कर अपना योगदान दे सकता है। इसलिए सभी लोगों को इसका लाभ उठाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बहुत से समूह सीएसआर के तहत शानदार काम कर रहे हैं। उन्होंने उत्तराखंड में स्थापित अन्य समूहों से भी अपना सीएसआर उत्तराखंड में ही खर्च करने की अपील की।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि ये कार्यक्रम कोई औपचारिक बैठक नहीं बल्कि देवभूमि उत्तराखंड के अंतिम छोर पर खड़े व्यक्ति के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का एक साझा संकल्प है। उन्होंने कहा कि इस आयोजन में कौशल विकास, सड़क सुरक्षा, महिला सशक्तिकरण, ग्राम विकास तथा शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में विभिन्न प्रतिष्ठित कंपनियों के साथ समझौता ज्ञापनों पर हस्ताक्षर किए किए गए हैं। साथ ही देश के प्रतिष्ठित कॉर्पोरेट समूहों ने उत्तराखंड के लिए कई नए प्रोजेक्ट्स की घोषणा भी की है।

उत्तराखंड की विकास संबंधित चुनौतियां भिन्न
इस मौके मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड की अपनी विशिष्ट परिस्थितियाँ हैं, उत्तराखंड एक पर्वतीय और सीमांत प्रदेश है। यहां की पारिस्थितिकी अत्यंत संवेदनशील है, इसलिए इस राज्य की विकास संबंधी चुनौतियां भी अन्य राज्यों से भिन्न हैं। यहां ज्यादा संसाधन और मेहनत खर्च करनी पड़ती है। इसलिए हमारे लिए “समग्र विकास” का अर्थ केवल सड़कें, भवन और आधारभूत संरचना खड़ी करना ही नहीं है

औद्योगिक विकास को समर्पित सरकार
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश सरकार उत्तराखंड को औद्योगिक विकास के क्षेत्र में नई ऊँचाइयों तक पहुँचाने के लिए निरंतर प्रयास कर रही है। इसी क्रम में वर्ष 2023 में ‘ग्लोबल इन्वेस्टर्स समिट’ का आयोजन किया, जिसमें राज्य को 3.56 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए थे। इसमें से अब तक 1 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश प्रस्तावों को धरातल पर उतारने में सफलता मिल चुकी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ने व्यापार को सुगम बनाने के लिए लाइसेंसिंग प्रोसेस को आसान करते हुए जहां एक ओर सिंगल विंडो सिस्टम की व्यवस्था लागू की है।


पारदर्शी नीतियों का लाभ मिला उद्योगों कोमुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि किसी भी राज्य में अच्छा औद्योगिक माहौल तब तक नहीं बन सकता जब तक कि शासन में पारदर्शिता न हो। इसलिए, प्रदेश सरकार ने प्रदेश के इतिहास में पहली बार भ्रष्टाचार के खिलाफ जीरो टॉलरेंस की नीति अपनाते हुए बीते वर्षों में 200 से अधिक भ्रष्ट अधिकारियों और कर्मचारियों के खिलाफ कड़ी कार्यवाही की है। राज्य सरकार की पारदर्शिता का सीधा लाभ उद्यमियों को मिल रहा है। उन्हें अब योजनाओं की स्वीकृति, जमीन आवंटन, औद्योगिक लाइसेंस या अन्य व्यावसायिक गतिविधियों में किसी भी अनावश्यक बाधा या भ्रष्टाचार का सामना नहीं करना पड़ता है।

मुख्यमंत्री ने उद्यमी को आश्वस्त करते हुए कहा कि राज्य सरकार उत्तराखंड को देश के अग्रणी “इन्वेस्टमेंट फ्रेंडली स्टेट” के रूप में स्थापित करने के लिए संकल्पित है। उन्होंने उम्मीद व्यक्त करते हुए कहा कि कॉर्पोरेट कुशलता और प्रदेश सरकार की पारदर्शी नीतियां मिलकर एक ऐसी ‘सस्टेनेबल इकोनॉमी’ का निर्माण करेंगी, जो पूरे देश के लिए एक उदाहरण बनेगी।
इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी, खजान दास, विधायक उमेश शर्मा काऊ, उपाध्यक्ष अवस्थापना अनुश्रवण परिषद विश्वास डाबर, प्रमुख सचिव आर.के सुधांशु, सचिव विनय शंकर पांडेय, एमडी सिडकुल डॉ. सौरभ गहरवार, अपर सचिव मनमोहन मैनाली शामिल हुए।

इनके साथ हुआ एमओयू
किया, हुंडई, लर्निंग – इंफोसिस फाउंडेशन, ओएनजीसी, आईटीसी, महिंद्रा लास्ट माइल मोबिलिटी लिमिटेड, आदित्य बिरला कैपिटल, फिनोलेक्स, पैनोसोनिक।
