बेतरतीब विकास रोकने के लिए पूरे क्षेत्र का किया जाए मास्टर प्लान तैयार
वर्षभर पर्यटन गतिविधियों के संचालन के लिए फेज वाइज प्लानिंग पर दिया जोर

उन्होंने कहा कि मास्टर प्लान तैयार करते समय सभी संबंधित स्टेकहोल्डर्स से विचार-विमर्श किया जाए, ताकि क्षेत्र की भौगोलिक परिस्थितियों, स्थानीय आवश्यकताओं, पर्यावरणीय संवेदनशीलता और पर्यटन की संभावनाओं को ध्यान में रखते हुए दीर्घकालिक योजना तैयार की जा सके। मास्टर प्लानिंग के लिए स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर (एसपीए), नई दिल्ली एवं एसपीए, भोपाल से तकनीकी सहयोग लेने की संभावनाओं पर भी विचार किया जाए।
मुख्य सचिव ने कहा कि टिहरी झील क्षेत्र को ग्लोबल डेस्टिनेशन बनाने के लिए पूरे लेक एरिया में विभिन्न पर्यटन गतिविधियों को समाहित करते हुए आकर्षण के प्रमुख केंद्र (मैग्नेट एरिया) विकसित किए जाएं। इसके लिए फेज वाइज योजना तैयार की जाए, ताकि प्राथमिकता के आधार पर विभिन्न परियोजनाओं को विकसित किया जा सके। उन्होंने निर्देश दिए कि टिहरी लेक में ऐसी पर्यटन गतिविधियों की विस्तृत योजना तैयार की जाए, जिससे पर्यटक क्षेत्र में कम से कम एक-दो दिन या उससे अधिक समय तक क्षेत्र में ठहर सकें। वाटर स्पोर्ट्स के साथ ही एडवेंचर, ट्रैकिंग, नेचर, कल्चर, विलेज टूरिज्म सहित विभिन्न गतिविधियों को एकीकृत रूप से विकसित किया जाए।

मुख्य सचिव ने कहा कि अप्रैल, मई और जून में जलस्तर कम रहने के दौरान भी पर्यटकों के लिए पर्याप्त गतिविधियां उपलब्ध रहें, इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार की जाए। वर्षभर पर्यटन गतिविधियों का संचालन सुनिश्चित करने के लिए मौसम एवं जलस्तर के अनुसार गतिविधियों का कैलेंडर तैयार किया जाए। उन्होंने टिहरी झील क्षेत्र में नए ट्रैकिंग रूट्स एवं ट्रेल्स विकसित करने तथा आसपास के गांवों को पर्यटन से जोड़ने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि पर्यटकों के लिए विलेज एवं कल्चरल विजिट की व्यवस्था विकसित की जा सकती है, जिससे उन्हें स्थानीय संस्कृति, परंपराओं, खान-पान और ग्रामीण जीवन से परिचित होने का अवसर मिले और स्थानीय लोगों को भी रोजगार एवं स्वरोजगार के अवसर प्राप्त हों।
उन्होंने कहा कि टिहरी लेक को ग्लोबल डेस्टिनेशन के रूप में विकसित करने की समग्र कार्ययोजना और प्रस्तावित गतिविधियों पर एक विस्तृत प्रेजेंटेशन तैयार की जाए, जिसे प्रधानमंत्री के समक्ष प्रस्तुत किया जा सके। मुख्य सचिव ने अगली बैठक में टीएचडीसी के अधिकारियों को भी आमंत्रित करने के निर्देश दिए, ताकि झील क्षेत्र के विकास से सम्बन्धित विभिन्न विषयों पर समन्वित रूप से चर्चा की जा सके।
इस अवसर पर सचिव धीराज सिंह गर्ब्याल, एपीसीसीएफ डॉ. विवेक पाण्डेय, सुरेन्द्र मेहरा, सीसीएफ प्रसन्ना कुमार पात्रो, अपर सचिव विनीत कुमार, हिमांशु खुराना, अभिषेक रोहिला एवं जिलाधिकारी टिहरी नितिका खण्डेलवाल उपस्थित थीं।
