
श्रमिक मंत्र, देहरादून। शिलांग की व्यस्त शहर-ज़िंदगी के बीच हाल ही में गांवों की खुशबू और मेहनत की कहानी भी सजी। ‘मासिक किसान बाजार’ में मेघालय के अलग-अलग जिलों से आए किसान अपने खेतों में उगाई गई संतरे, कद्दू, काली मिर्च, शहद और अन्य स्थानीय उत्पादों के साथ शहरवासियों के सामने खड़े थे। इनमें से कई किसानों के लिए यह पहला अवसर था जब वे बिचौलियों के बिना सीधे उपभोक्ताओं से जुड़ रहे थे।
यह पहल राज्य के मुख्यमंत्री कोनराड के संगमा के नेतृत्व में शुरू की गई है। इसका उद्देश्य ग्रामीण उत्पादकों को बेहतर बाजार उपलब्ध कराना है। इस मासिक किसान बाजार का आयोजन 1917 iTEMS द्वारा कृषि एवं किसान कल्याण विभाग के सहयोग से किया जा रहा है, जिसे मेघालय किसान (सशक्तिकरण) आयोग का भी समर्थन प्राप्त है। पहले ही आयोजन में कई स्टॉल का सामान पूरी तरह बिक गया, लेकिन इससे भी बड़ी उपलब्धि किसानों के चेहरे पर झलकता आत्मविश्वास रहा।

‘पहचान’ का मंच बना किसान बाजार
ईस्ट खासी हिल्स के पुरींग गांव की किसान पिनहुनलांग मिंसोंग के लिए यह अनुभव बेहद भावुक रहा। उन्होंने राज्य सरकार का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि गांव से निकलकर सार्वजनिक बाजार में अपने उत्पाद बेचने का अवसर उनके लिए गर्व का क्षण है। “यहां लोग हमसे पूछ रहे थे कि हम खेती कैसे करते हैं। हमारे उत्पादों में उनकी रुचि देखकर विश्वास बढ़ा है कि आने वाले समय में हमें और बड़े मंच मिलेंगे,” उन्होंने कहा।
वेस्ट जयंतिया हिल्स के नोंग क्या नरिह गांव की थेरीस सिंगकों ने भी इसी तरह की भावना व्यक्त की। उन्होंने बताया कि वे पूरी तरह जैविक खेती करती हैं और किसी रासायनिक उर्वरक का उपयोग नहीं करतीं। “पहले लगता था कि इतनी मेहनत का क्या लाभ होगा, लेकिन आज जब लोग हमारे उत्पादों को सराह रहे हैं, तो आगे बढ़ने का हौसला मिला है,” उन्होंने कहा।
समूहों के लिए भी खुल रहे नए रास्ते
मावशुन, पिनुर्सला ब्लॉक की विक्टोरिया टांग पर ‘इआत्रेइलांग वन धन विकास केंद्र (VDVK)’ का प्रतिनिधित्व करती हैं, जिसमें लगभग 300 सदस्य जुड़े हैं। वर्ष 2021 में बने इस समूह ने सरकार के सहयोग से राज्य के बाहर आयोजित ‘सरस मेले’ और प्रदर्शनियों में भी भाग लिया है।
विक्टोरिया कहती हैं, “शिलांग का यह बाजार हमारे लिए खास है क्योंकि यह हमारे घर और उपभोक्ताओं के ज्यादा करीब है। जब लोग जैविक उत्पादों का महत्व समझते हैं, तो उसका लाभ हम सभी किसानों को मिलता है।” उनके समूह के सुपारी, झाड़ू घास, संतरा, शहद और काली मिर्च जैसे उत्पाद अब गांव की सीमाओं से बाहर पहचान बना रहे हैं।
मेघालय किसान (सशक्तिकरण) आयोग के अध्यक्ष पी.एस. थांगखिएव ने बताया कि कोविड-19 महामारी के दौरान ग्रामीण विक्रेताओं को बाजार तक पहुंचने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। इसी अनुभव से मासिक किसान बाजार की अवधारणा सामने आई।
उन्होंने कहा, “हमने सोचा कि एक ऐसा मंच तैयार किया जाए, जहां दूर-दराज के किसान हर महीने आकर अपने उत्पाद बेच सकें। भविष्य में इसे अन्य जिला मुख्यालयों तक भी विस्तार दिया जाएगा, ताकि किसानों को उचित मूल्य मिल सके।”
उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि यह पहल पूरी तरह किसान-केंद्रित रहेगी और स्थानीय प्लेटफॉर्म ‘सोमोई’ जैसे डिजिटल माध्यमों का सहयोग भी लिया जा रहा है, जिससे उत्पादों की पहुंच और बढ़ सके।

कम हुई दूरी, बढ़ा सम्मान
मासिक किसान बाजार केवल खरीद-बिक्री का मंच नहीं है, बल्कि यह गांव और शहर के बीच की दूरी कम करने का माध्यम बन रहा है। बिचौलियों पर निर्भरता घटने से किसानों को उचित मूल्य मिल रहा है और उनकी मेहनत को सम्मान भी।
मेघालय सरकार की यह पहल बताती है कि यदि सही नीयत और नीति के साथ बाजार तक सीधी पहुंच दी जाए, तो किसान केवल उत्पादक नहीं, बल्कि आत्मनिर्भर उद्यमी बन सकते हैं।
शिलांग पहुंचे कई किसानों के लिए यह दिन किसी अंत की नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत की तरह था—आत्मविश्वास की, जुड़ाव की और इस भरोसे की कि उनकी मिट्टी से जुड़ी मेहनत को अब शहर में भी उचित स्थान मिल रहा है।
