राष्ट्रीय कवि संगम की महिला इकाई की ओर से गुफ्तगू बुक एंड काफी बार में हुआ काव्य समागम

चल रहा हूँ लेकर बीन आजकल दिन ढलते ही शाम घनी गुमनाम यहाॅं होती है
राष्ट्रीय कवि संगम की महिला इकाई की ओर से विधानसभा रोड स्थित गुफ्तगू बुक एंड काफी बार में हुआ काव्य समागम
कवियों ने कवि गोष्ठी में प्यार-मोहब्बत और देशभक्ति की रचनाओं से श्रोताओं की तालियां बटोरी

श्रमिक मंत्र,देहरादून। राष्ट्रीय कवि संगम की महिला इकाई की ओर से विधानसभा रोड स्थित गुफ्तगू बुक एंड काफी बार में आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने जहां प्यार-मोहब्बत की रचनाएं सुनाई, वहीं देशभक्ति की रचनाओं से जोश भरा। कवि गोष्ठी की अध्यक्षता संस्था की अध्यक्ष मीरा नवेली ने की, जबकि संचालन धमेन्द्र उनियाल धर्मी ने किया। काव्य गोष्ठी की शुरुआत नीरू गुप्ता मोहिनी ने सरस्वती वंदना से की।

इसके बाद कविताओं का सिलसिला शुरू हुआ। मीरा नवेली ने मौजूदा हालात को भगवान श्री कृष्ण से जोड़ते हुए अपनी रचना श्अब तक सुनाई थी बंसी कन्हाई, अब है सुदर्शन चक्र की बारी। सभी श्रोताओं का दिल जीत लिया। वरिष्ठ कवी जसवीर सिंह ने घर के भेदी थे घटना में ,या थे सीमा पार से । लाल किले ने प्रश्न किया है ,भारत की सरकार से ।। के साथ ही आतंक की बू आती क्यों , मस्जिद की मीनार से ।

वही चमन को सींचा है अपने लहू से, बागवानों ने सवाल ये है के अब फूलों की हिफाजत कौन करे एडवोकेट जावेद अहमद ने अपनी कविता पढ कर सभी श्रोता को सोचने पर मजबूर कर दिया कर दिया। वही गीत कार शिव मोहन ने दिन ढलते ही शाम घनी गुमनाम यहाँ  होती है ,आज कहाँ अभिमान किसी की शाम यहाँ होती है ष्की  कविता को खुब सराहा गया ।श्रीकांत श्री ने अपनी कविता जिनके बलिदानों से स्वर्णिम यह भारत आज बताता हूँ , एक अमर कहानी पन्ना की तुम सबको आज सुनाता हूँ ।

नीरू गुप्ता मोहिनी की कविता शक्ति-बुद्धि के सामने, ठहर सकता है कौन। सद्बुद्धि कह रही यही, रखो अधर पर मौन।। पर खूब तालिया बटोरी । वरिष्ठ कवि के साथ ही कुशल संचालक धर्मेन्द्र उनियाल धर्मी ने मैं चल रहा हूँ लेकर बीन आजकल , साथ में पिटारे दो तीन आजकल।

आस्तीन के सांपों से निपटने के लिये ,मैंने चढ़ा रखी है आस्तीन आजकल । काव्य पाठ कर सभी का दिल जीत लिया । हरिद्वार से सुशील रावत ने पहली वार राष्टिय कवि संगम मंच की गोष्टी मे अपना कविता ष्शहर की गालियों में गांव की धूल ढूंढ रहा हूं,,काँटों की इस नगरी में मैं फूल ढूंढ रहा हूं,,ष् पढ कर खुब वाह वाही लुटा ।

शिवशंकर कुशवाहा ने कहा रू श् भरी महफिल में तू बहुत याद आती है मां। रोक नहीं पाता आंखें बरस जाती हैं मांश्  से वाहवाही लूटी। इंटर नेशनल खिलाड़ी मोहम्म्द कैफ ने ष्इस फरेवी दुनिया में दुनिया दारी नही आती,झुठ को सच करना हमे नही आतीष् पढ कर खुब वाह वाही लुटी । वही आए हुए सभी कवि व कवित्रियों ने अपने अपने कविता से सभी को मंत्रमुग्ध कर दिया ।