श्रमिक मंत्र,देहरादून। राज्य की बेशकीमती जमीनों को औने पौने दामों पर बेचने का लगाया आरोप। सरकारी जमीने बेचने के निर्णयों को निरस्त कर संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की की गई मांग।

4. यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 का उल्लंघन सरकारी भूमियों और संपत्तियों के संबंध में बनाए गए यू0आई0आई0डी0बी0 अधिनियम, 2023 की धारा 28(3)(घ) के अनुसार हर परियोजना पर सरकार और संबंधित विभाग का अनुमोदन अनिवार्य है, और धारा 28(4) के अनुसार मुद्रीकरण राज्य सरकार के निर्देश पर ही हो सकता है। बाद में मूल विभाग की सहमति की शर्त यह कहकर हटा दी गई कि मुख्यमंत्री का अनुमोदन प्राप्त है। सरकारी भूमियों और संपत्तियों को लीज हेतु यू0आई0आई0डी0बी0 को हस्तांतरित करने वाली फाइलों में किसी विभागीय मंत्री की सहमति दर्ज नहीं है।
6. बिना राजस्व अभिलेख और बिना पैमाइश के हस्तांतरणः 15 जनवरी 2025 को पटवाडांगर की भूमि यू0आई0आई0डी0बी0 को हस्तांतरित करने के लिए जारी शासनादेश में इस भूमि को “कृषि विभाग की” बताया गया है, जबकि राजस्व विभाग ने 04.09.2025 को अधिसूचना संख्या 661 से गाँव का सर्वेक्षण शुरू किया और राजस्व परिषद ने 09.09.2025 के पत्र संख्या 2708 में लिखा कि यह 108 एकड़ भूमि “वन विभाग एवं राजस्व विभाग के अभिलेखों में दर्ज नहीं” है। डाकपत्थर की भूमि भी बंदोबस्त पूरा हुए बिना और बिना खसरा संख्या के दे दी गई। बिना राजस्व अभिलेखों और स्पष्ट मालिकाना हक के भूमि का हस्तांतरण राज्य में प्रचलित भू-राजस्व अधिनियम तथा जमींदारी विनाश एवं भूमि व्यवस्था अधिनियम का उल्लंघन है।
7. शासनादेशों की अपनी शर्तों और वन कानून का उल्लंघन भूमि और संपत्ति हस्तांतरण के लिए निर्मित सभी शासनादेशों की शर्त है कि धार्मिक या ऐतिहासिक महत्व की इमारत वाली भूमि नहीं दी जाएगी और भूमि केवल अनुमोदित परियोजना के लिए दी जाएगी। इनमें से कोई भी परियोजना अनुमोदित नहीं है। हर की पैड़ी का अलकनंदा होटल और ऋषिकेश सहित 25 निरीक्षण भवन (जिनमें 1866 से 1928 तक के ब्रिटिशकालीन भवन भी हैं) इस सूची में हैं। रामगढ़ के राजकीय उद्यान की 8 हेक्टेयर भूमि में से लगभग 4 हेक्टेयर घना वन है, जिसका गैर-वन उपयोग वन संरक्षण कानून के विरुद्ध है।
अतः आपसे निवेदन है किः-
(1). जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट से संबंधित सभी पत्रावलियां मँगाई जाएँ, नियम विरुद्ध की गई जॉर्ज एवरेस्ट एस्टेट की लीज निरस्त की जाए और पूरे मामले की उच्च न्यायालय की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए।
(2). 20 दिसंबर 2022 के कैबिनेट निर्णय के अंतर्गत मुख्यमंत्री द्वारा अकेले लिए गए सभी निर्णय तथा उनसे जारी शासनादेश निरस्त किए जाएँ।
(3) यू0आई0आई0डी0बी0 के तीनों टेंडर, पटवाडांगर (टेंडर संख्या 97862/2026), अलकनंदा होटल हरिद्वार (टेंडर संख्या 99265/2026) और ऋषिकेश निरीक्षण भवन (टेंडर संख्या 99301/2026), तत्काल निरस्त किए जाएँ।
(4). यू0आई0आई0डी0बी0 और सिडकुल को दी गई सभी जमीन और संपत्ति में उनके मूल विभागों को वापस की जाए, और लोक निर्माण विभाग के निरीक्षण भवनों को पी0पी0पी0 में देने की प्रक्रिया रोकी जाए।
उपरोक्त के अलावा निम्नलिखित महत्वपूर्ण प्रकरणों की ओर भी आपका ध्यान आकृष्ट करना चाहते हैं-
1. कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति का मामला
राज्य सरकार में कैबिनेट मंत्री गणेश जोशी के विरुद्ध आय से अधिक संपत्ति अर्जित करने के मामले में माननीय न्यायालय द्वारा मुकदमा दर्ज करने की अनुमति से संबंधित निर्देश दिये जाने के बावजूद राज्य सरकार द्वारा अभी तक आवश्यक अनुमति प्रदान नहीं की गई है। यह अत्यंत गंभीर विषय है कि जब किसी जनप्रतिनिधि के विरुद्ध भ्रष्टाचार के मामले में न्यायालय द्वारा निर्देश दिये गये हों, तब सरकार की ओर से कार्रवाई में देरी क्यों की जा रही है? इससे सरकार की भ्रष्टाचार के प्रति कथित जीरो टॉलरेंस की नीति पर भी सवाल उठते हैं। अतः इस मामले में तत्काल वैधानिक अनुमति एवं निष्पक्ष जांच सुनिश्चित की जानी चाहिए।

कोरोना महामारी के दौरान जब आम नागरिकों को घरों से बाहर निकलने तक की अनुमति नहीं थी तथा पूरा देश अभूतपूर्व संकट से गुजर रहा था, उस समय प्रदेश के सहकारिता मंत्री धन सिंह रावत के कार्यकाल में राज्य से बाहर प्रतियोगी परीक्षा आयोजित कर सहकारिता विभाग में भर्तियां की गईं। इन भर्तियों में कथित रूप से अभ्यर्थियों से 20-20 लाख रुपये लेकर नौकरियां बेचे जाने के गंभीर आरोप सामने आये हैं।
उत्तराखंड प्रदेश कांग्रेस कमेटी प्रतिनिधिमंडल ने कहा इस ज्ञापन की प्राप्ति के 10 दिनों के भीतर उपरोक्त निर्णयों को निरस्त करने और संपत्तियों को उनके मूल विभागों को लौटाने की कार्यवाही की जाए। यदि इस अवधि में राज्य सरकार और मुख्यमंत्री के ये निर्णय वापस नहीं लिए गए और जमीनें विभागों को नहीं लौटाई गईं, तो उत्तराखंड की जनता की संपत्ति बचाने के लिए कांग्रेस को मजबूरन माननीय उच्च न्यायालय की शरण लेनी पड़ेगी।प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष गणेश गोदियाल, नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य, पूर्व मुख्यमंत्री हरीश रावत, चुनाव अभियान समिति के अध्यक्ष प्रीतम सिंह, चुनाव प्रबंधन समिति के अध्यक्ष डॉ0 हरक सिंह रावत, विधायक मदन बिष्ट, फुरकान अहमद, पूर्व विधायक मनोज रावत, प्रदेश उपाध्यक्ष सीपी सिंह, राजीव महर्षि, प्रदेश महामंत्री राजेन्द्र शाह, महिला अध्यक्ष ज्योति रौतेला, सुरेन्द्र सिंह रांगड, राजेश चमोली आदि शामिल थे।
