साई ग्रुप ऑफ इंस्टीट्यूशंस में क्षय रोग उन्मूलन अभियान में योगदान देने वाले विद्यार्थियों एवं कार्यक्रम समन्वयक को किया गया सम्मानित

श्रमिक मंत्र, देहरादून। क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन के लिए संचालित निक्षय मित्र कार्यक्रम के अंतर्गत उल्लेखनीय योगदान देने वाले 13 विद्यार्थियों को सम्मानित किया गया। इन विद्यार्थियों ने निक्षय मित्र पोर्टल पर सरकार के साथ समन्वय स्थापित करते हुए डेटा भरने तथा कार्यक्रम से संबंधित कार्यों में सहयोग प्रदान किया। उनके इस योगदान को टीबी उन्मूलन के राष्ट्रीय अभियान में जनभागीदारी और सामाजिक उत्तरदायित्व की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना गया। सम्मानित होने वाले विद्यार्थियों में **जतिन चोपड़ा, चेतन मनराल, निकिता पांडे, प्राची, वंशिका, अभिषेक, पीयूष, प्रेरणा, काजल नेगी, सृष्टि, हर्षित, आयुषी एवं मितिक्षा** शामिल हैं।
इस अवसर पर *डॉ. आरती रैथान* को भी निक्षय मित्र कार्यक्रम में जमीनी स्तर पर सक्रिय भूमिका निभाने तथा पिछले चार वर्षों से सरकार के साथ समन्वय स्थापित कर कार्यक्रम के संचालन में निरंतर योगदान देने के लिए सम्मानित किया गया। उनके प्रयासों ने कार्यक्रम की गतिविधियों को आगे बढ़ाने तथा टीबी उन्मूलन के उद्देश्य के प्रति जागरूकता और सहभागिता को प्रोत्साहित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।

इस अवसर पर अध्यक्ष हरीश अरोड़ा, डॉ. एस.एस.गुसाईं सी.ए.ओ, डॉ. शीबा फिलिप्स-प्रिंसिपल नर्सिंग, सुश्री श्रुति अग्रवाल और दूसरे विभाग के प्रमुख आदि उपस्थित थे और पैरामेडिकल के सभी छात्र शामिल हुए और डॉ. मनोज वर्मा के द्वारा टीबी के बारे में एक विस्तृत व्याख्यान दिया गया कि टीबी की बीमारी से कैसे बचा जा सकता है। निक्षय मित्र कार्यक्रम भारत सरकार के टीबी उन्मूलन अभियान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जिसके माध्यम से टीबी से प्रभावित व्यक्तियों को सामुदायिक सहयोग प्रदान करने और समाज के विभिन्न वर्गों की भागीदारी सुनिश्चित करने पर जोर दिया जाता है।
साई इंस्टिट्यूट ने टीबी उन्मूलन में काम करते हुए अभी तक 70 से अधिक मरीजों को गोद लिया है और उनके स्वास्थ्य के लिए हर महीने पोषण आहार देते हैं, जिनके मरीजों का स्वास्थ्य अच्छा हो और रिकवरी हो साथ ही साई इंस्टिट्यूट नशे की लत के खिलाफ भी समाज में जागरूकता का काम कर रहा है। विद्यार्थियों एवं डॉ. आरती रौथान का सम्मान उनके समर्पण, सामाजिक सेवा और जनस्वास्थ्य के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। इस प्रकार की पहल विद्यार्थियों को सामुदायिक स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करती है तथा टीबी मुक्त भारत के लक्ष्य को प्राप्त करने में सहयोग प्रदान करती है।
