

उन्होंने कहा कि जब देश चैन की नींद सोता है, तब हमारे सैनिक सीमाओं पर जागकर राष्ट्र की सुरक्षा सुनिश्चित करते हैं। सैनिक केवल सीमा पर तैनात जवान नहीं हैं, बल्कि वे देश की एकता, अखंडता और संप्रभुता के प्रहरी हैं। उत्तराखण्ड की धरती को देवभूमि के साथ-साथ वीर भूमि के रूप में भी जाना जाता है। यहां के हजारों परिवारों की पीढ़ियों ने भारतीय सेना में अपनी सेवाएं दी हैं। प्रदेश के युवाओं में सेना के प्रति समर्पण और राष्ट्रसेवा की भावना सदियों से रही है। मंत्री ने कहा कि आज का दिन उन सभी वीर सैनिकों और शहीदों को नमन करने का अवसर भी है, जिन्होंने मातृभूमि की रक्षा के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। उनका त्याग और शौर्य आने वाली पीढ़ियों को सदैव राष्ट्र सेवा के लिए प्रेरित करता रहेगा।

उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक और वीर नारियां राष्ट्र की अमूल्य धरोहर हैं। एक सैनिक के साथ-साथ उसका परिवार भी देशसेवा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। सैनिकों और उनके परिवारों के सम्मान, कल्याण एवं हितों की रक्षा करना समाज और सरकार की सामूहिक जिम्मेदारी है। मंत्री जोशी ने कुमाऊँ रेजिमेंट के सभी जवानों एवं पूर्व सैनिकों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि रेजिमेंट की गौरवशाली परंपरा इसी प्रकार निरंतर आगे बढ़ती रहे और हमारे वीर जवान सदैव देश का मान-सम्मान बढ़ाते रहें।
इस अवसर पर गोविन्द सिंह, गंगा दत्त बिनवाल, हरी सिंह, मंजू देउपा, गंगा सिंह, देवकी बिनवाल, कैलाश सिंह, दरबान सिंह, रामदत्त, नन्दन सिंह सहित सैन्य अधिकारीगण, वीर जवान, पूर्व सैनिक, वीर नारियां एवं उनके परिवारजन उपस्थित रहे।
