माननीय मंत्री सुबोध उनियाल जी ने श्याम कृष्ण पंवार सरस्वती शिशु मंदिर, 14 बीघा, मुनि की रेती के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया।

श्रमिक मंत्र, देहरादून। माननीय मंत्री सुबोध उनियाल जी ने श्याम कृष्ण पंवार सरस्वती शिशु मंदिर, 14 बीघा, मुनि की रेती के वार्षिकोत्सव कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में प्रतिभाग किया। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्वलन एवं सरस्वती वंदना के साथ हुआ।
इस अवसर पर विद्यालय परिवार के छात्र-छात्राओं, गुरुजनों एवं अभिभावकों को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री जी ने कहा कि सरस्वती शिशु मंदिर “सा विद्या या विमुक्तये” के मूल मंत्र की भावना के साथ राष्ट्र निर्माण का कार्य कर रहा है। उन्होंने कहा कि विद्या भारती के विद्यालय केवल ज्ञान अर्जन का माध्यम नहीं हैं, बल्कि वे बच्चों में संस्कार, अनुशासन और भारतीय संस्कृति के मूल्यों का विकास भी करते हैं। ऐसे शिक्षण संस्थान राष्ट्रवाद की भावना का विकास कर विकसित भारत के निर्माण के लिए मजबूत नींव तैयार कर रहे हैं।

विद्यालय परिवार द्वारा स्मार्ट क्लास, 20 कंप्यूटर एवं अन्य शैक्षिक संसाधनों हेतु विधायक निधि से 10 लाख रुपये की सहयोग राशि का अनुरोध किया गया। बच्चों के उज्ज्वल भविष्य एवं डिजिटल शिक्षा को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से माननीय मंत्री जी ने 11 लाख रुपये की सहयोग राशि प्रदान करने की घोषणा की। इस घोषणा से विद्यार्थियों, अभिभावकों एवं गुरुजनों माननीय मंत्री जी के प्रति आभार व्यक्त किया।
कार्यक्रम के दौरान नन्हे-मुन्ने बच्चों द्वारा हमारी लोकसंस्कृति पर आधारित आकर्षक सांस्कृतिक कार्यक्रम प्रस्तुत किए गए। साथ ही विज्ञान तथा ग्रामीण जीवन शैली पर आधारित प्रदर्शनी का भी अवलोकन किया गया। मंत्री जी ने विद्यार्थियों को जीवन में लक्ष्य निर्धारित कर परिश्रम, नैतिकता एवं समर्पण के साथ आगे बढ़ने का संदेश दिया। उन्होंने विद्यालय प्रबंधन एवं शिक्षकों की सराहना करते हुए कहा कि ऐसे शिक्षण संस्थान भारत की नींव को सशक्त बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।

कार्यक्रम के दौरान कार्यक्रम अध्यक्ष चन्द्रवीर पोखरियाल जी, प्रधानाचार्य सुरेन्द्र सिंह नेगी जी, प्रांत सह प्रदेश निरीक्षक (विद्या भारती) विनोद रावत जी, नगरपालिका अध्यक्ष नीलम बिजल्वाण जी, पूर्व नगरपालिका अध्यक्ष रोशन रतूड़ी जी, विमला देवी जी सहित छात्र-छात्राएं, गुरुजन एवं अभिभावक गण उपस्थित रहे।
