भाड़े की भीड़ कहकर भाजपा ने एक बार फिर किया उत्तराखंड की देवतुल्य जनता का अपमान – गरिमा

दसौनी ने कहा कि बीते रोज़ राजभवन कूच
में शामिल लोग कोई किराए के लोग नहीं थे
वे इस प्रदेश के मतदाता थे, जागरूक नागरिक थे, अपने अधिकारों के लिए आवाज उठाने वाली जनता थे।गरिमा ने कहा भाजपा ये न भूले कि लोकतंत्र में जनता ही जनार्दन होती है।
जनता को “भाड़े का” कह देना भाजपा की मानसिकता और अहंकार को दर्शाता है।
जब भी जनता सवाल पूछती है,
भाजपा उसे बदनाम करने का प्रयास करती है।
यह दुर्भाग्यपूर्ण है।
सच्चाई यह है कि भाजपा को दूसरों पर आरोप लगाने से पहले अपने राजनीतिक आचरण पर विचार करना चाहिए।
दूसरे दलों में तोड़फोड़ कर भाड़े पर नेताओं और कार्यकर्ताओं को शामिल करना उनकी पुरानी रणनीति रही है
लेकिन कांग्रेस का कार्यकर्ता विचार से जुड़ा होता है, किसी सौदे से नहीं।
उत्तराखंड की जनता स्वाभिमानी है।
वह अपमान को याद रखती है।
जनता का अपमान करने वाली सोच को लोकतंत्र में जवाब भी जनता ही देती है
और समय आने पर यह देवभूमि की जनता अपना निर्णय स्पष्ट रूप से सुनाएगी।
