भट्ट ने जोशीमठ ओबीसी जातियों को केंद्रीय सूची में शामिल करने का मुद्दा संसद में उठाया!
छावनी बोर्ड निधि आवंटन में देरी, सिविल क्षेत्रों के पालिका सम्मेलन प्रक्रिया और लंबित चुनाव के चलते

किंतु उन्हें अभी तक भारत सरकार की केंद्रीय अन्य पिछड़ा वर्ग सूची में सम्मिलित नहीं किया गया है। जबकि जोशीमठ के पैंखंडा समुदाय को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करने की बेहद आवश्यकता है। जो न केवल हमारे प्रदेश के सामाजिक आर्थिक ढांचे से जुडा है बल्कि यह हमारे संविधान की मूल भावना को भी समर्पित है, जो समता, न्याय और अवसर की समानता पर आधारित है।
उन्होंने इस विषय से प्रभावित लोगों की समस्याओं का जिक्र करते हुए कहा कि केंद्रीय सूची में सम्मिलित न होने के कारण संबंधित समुदायों को केंद्र सरकार द्वारा संचालित विभिन्न शैक्षणिक छात्रवृत्ति, योजनाओं रोजगार के अवसरों तथा अन्य कल्याणकारी योजनाओं का लाभ प्राप्त नहीं हो पा रहा है। जबकि राज्य में पहले से ही कई समुदाय ओबीसी श्रेणी में शामिल हैं और पैंखंडा समुदाय भी उसी समानता की उम्मीद करता है। यह विषय सामाजिक न्याय के सिद्धांतों तथा संविधान के अनुच्छेद 15 (4) एवं 16 (4) की भावना से प्रत्यक्ष रूप से जुड़ा हुआ है। राज्य सरकार द्वारा की गई अनुशंसाओं के बावजूद इस संबंध में अभी तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।
वहीं विश्वास जताते हुए कहा कि जोशीमठ के पैंखंडा समुदाय को ओबीसी की केंद्रीय सूची में शामिल करने से न केवल इस समुदाय को लाभ मिलेगा बल्कि यह समाज के समग्र विकास की दिशा में भी एक सकारात्मक कदम होगा। जिसके लिए सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री से अनुरोध करते हुए कहा कि जोशीमठ क्षेत्र की संबंधित अन्य पिछड़ा वर्ग की जातियों को केंद्रीय ओबीसी सूची में सम्मिलित करने हेतु शीघ्र आवश्यक कार्यवाही की जाए।
इसी तरह एक अन्य महत्वपूर्ण विषय को उठाते हुए उनके द्वारा छावनी बोर्डों के लंबित चुनाव और वित्त आयोग द्वारा इन बोर्डों को दिए जाने वाले अनुदान को लेकर सवाल पूछा गया। जिस पर जवाब देते हुए रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने बताया कि वर्तमान वर्ष में, 29 छावनी बोर्ड केन्द्रीय वित्त आयोग अनुदानों के अंतर्गत पहले ही निधियां प्राप्त कर चुके हैं।
